खुशियों के बीच मातम: जर्मनी से दोस्त की शादी में आए युवक की हार्ट अटैक से मौत

​जोधपुर में एक पल में छिन गईं खुशियां, परिजनों ने किया नेत्रदान
 
Raj

राजस्थान के जोधपुर से एक अत्यंत हृदय विदारक खबर सामने आई है, जिसने विवाह समारोह की खुशियों को पल भर में गहन मातम में बदल दिया। जर्मनी में कार्यरत एक युवा, शशांक पारख, जो अपने दोस्त की शादी में शामिल होने के लिए विशेष रूप से जोधपुर आए थे, बारात में नाचते समय हार्ट अटैक आने से असमय ही काल के ग्रास बन गए। इस दुखद घटना के बावजूद, शोकाकुल परिवार ने एक प्रेरणादायक फैसला लेते हुए शशांक की आँखें दान कर दीं, जिससे दो लोगों की जिंदगी में रोशनी आ सकेगी।

​खुशियों का सफर, दुखद अंत

​जोधपुर के चांदी हाल, कपड़ा बाजार निवासी और जर्मनी में अपनी नौकरी कर रहे 32 वर्षीय शशांक पारख कुछ ही दिन पहले अपने दोस्त की शादी में शिरकत करने के लिए शहर आए थे। शुक्रवार को उनके दोस्त की बारात बड़े ही धूमधाम से निकली। सिवांची गेट के पास जब बारात में नाच-गाना चल रहा था, तभी ऊर्जा और उत्साह से नाचते हुए शशांक की अचानक तबीयत बिगड़ी। किसी को अंदाजा नहीं था कि खुशियों के इन पलों में नियति का इतना क्रूर खेल होने वाला है। नाचते हुए ही वह जमीन पर गिर पड़े और उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया।

​परिजनों ने बताया कि जब शशांक डांस कर रहे थे, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनके जीवन का अंतिम नृत्य होगा। आनन-फानन में उन्हें तुरंत एमजीएच अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन युवा शशांक को बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, जिससे खुशियों से भरा माहौल एकाएक चीखों और सिसकियों में डूब गया।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

​इस अचानक हुई घटना से शशांक का परिवार स्तब्ध रह गया। 32 वर्ष की अल्पायु में शशांक का जाना परिवार के लिए असहनीय सदमा था। उनकी पत्नी और एक छोटी बच्ची हैं, जिन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस युवक का जीवन अभी अपने चरम पर था, जो अपने दोस्त की खुशियों में शामिल होने सात समंदर पार से आया था, उसकी इस तरह असामयिक मृत्यु ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना एक बार फिर से युवाओं में बढ़ते हृदय रोगों के खतरे की ओर इशारा करती है।

गम के बीच मानवता की मिसाल: नेत्रदान का महान संकल्प

​इस विकट और मुश्किल की घड़ी में भी शशांक के परिवार ने मानवता की अद्भुत मिसाल पेश की। अस्पताल में मौजूद आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान और कैलाश जैन ने जब शोकाकुल परिवार के सामने नेत्रदान का प्रस्ताव रखा, तो गम में डूबे परिवार ने एक पल का ठहराव लिया और एक बड़ा फैसला किया।

​परिवार ने तय किया कि भले ही शशांक अब उनके बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी आँखों की रोशनी किसी और के जीवन में उजाला भर सकती है। यह फैसला सिर्फ एक नेत्रदान नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी दूसरों के लिए जीने की एक महान भावना का प्रतीक है।

​महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी में, परिजनों की सहमति के बाद, आई बैंक के राजेश सिंघवी और तकनीकी कर्मचारी मैना व्यास ने सुरक्षित रूप से शशांक के नेत्र निकाले। ये कॉर्निया अब दो दृष्टिबाधित लोगों को दुनिया देखने का अमूल्य तोहफा देंगे।

​परिजनों ने कहा कि शशांक की आँखों की रोशनी अगर किसी दो परिवारों की दुनिया रोशन कर दे, तो यह उनके लिए सबसे बड़ी और सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस दुःखद घटना ने भले ही एक परिवार से उनका सदस्य छीन लिया, लेकिन नेत्रदान के इस महान कार्य ने शशांक को दो और जिंदगियों में अमर कर दिया।

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