संसद में 'वंदे मातरम' की बहस से 'मुस्लिम लीग' हुई वायरल: PM मोदी ने साधा निशाना, जानिए क्या है पूरी कहानी

क्यों अचानक चर्चा में आई मुस्लिम लीग? PM मोदी का नेहरू पर हमला.
 
PM मोदी ने साधा निशाना, जानिए क्या है पूरी कहानी
हाल ही में संसद में 'वंदे मातरम' को लेकर हुई बहस ने अखिल भारतीय मुस्लिम लीग को एक बार फिर चर्चा का केंद्र बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में बोलते हुए कांग्रेस पर बड़ा हमला किया और आरोप लगाया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने मुस्लिम लीग के दबाव में आकर राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के मुद्दे पर समझौता किया था।
​प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में दावा किया कि नेहरू ने एक पत्र में लिखा था कि उन्हें 'वंदे मातरम' गीत की पृष्ठभूमि पढ़ने के बाद लगा कि इससे मुस्लिम भड़केंगे, जिसके चलते कांग्रेस को इस गीत के बंटवारे पर झुकना पड़ा। PM मोदी ने जोर देकर कहा, "कांग्रेस वंदे मातरम् के बंटवारे पर झुकी, इसलिए उसे एक दिन भारत के बंटवारे के लिए झुकना पड़ा।" PM के इस बयान के बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक मुस्लिम लीग और उसकी भूमिका पर बहस तेज हो गई है।
गौरव गोगोई और निशिकांत दुबे के बीच नोंक-झोंक
​संसद में यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई ने सदन में 'जय श्री राम' के नारों पर सवाल उठाया। गोगोई ने कहा कि वह जानते हैं कि बीजेपी के सांसद 'जय श्री राम' क्यों बोलते हैं, लेकिन देश के सभी धर्मों को एक साथ लाने वाला नारा 'जय हिंद' है।
​इसके जवाब में, बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने नेहरू और मुस्लिम लीग के संदर्भ को उठाते हुए पलटवार किया। दुबे ने कहा कि कांग्रेस 'वंदे मातरम' गाने के लिए भी तैयार नहीं थी, और यह वही पार्टी है जिसने मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन किया। उन्होंने कहा कि "नेहरू ने ही मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम को तोड़ दिया।" दुबे ने दावा किया कि कांग्रेस की राजनीति हमेशा से तुष्टिकरण की रही है।
​निशिकांत दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता मोहम्मद अली जिन्ना को सेक्युलर मानते थे, जबकि बीजेपी और पूरा देश जिन्ना को देश के विभाजन का मुख्य जिम्मेदार मानता है। उन्होंने कहा कि देश को तोड़ने वाले मोहम्मद अली जिन्ना को सेक्युलर बताने वाली कांग्रेस क्या देश को एक कर सकती है?
वंदे मातरम' और मुस्लिम लीग का इतिहास
​'वंदे मातरम' गीत, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक शक्तिशाली प्रेरणास्रोत रहा है। यह गीत भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया था। हालांकि, अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने इस गीत का विरोध किया था। मुस्लिम लीग का तर्क था कि यह गीत मूर्ति पूजा को बढ़ावा देता है और इस्लाम की मान्यताओं के खिलाफ है।
​इस विवाद के चलते, आजादी के बाद जब राष्ट्रीय गीत का चयन किया गया, तो 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो छंदों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया, जबकि रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित 'जन गण मन' को राष्ट्रीय गान का दर्जा दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग को खुश करने और देश में विभाजन की राजनीति से बचने के लिए 'वंदे मातरम' के पूर्ण रूप को अपनाने के मुद्दे पर समझौता कि 
 जिन्ना और मुस्लिम लीग की विवादास्पद छवि
​अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में ढाका में मुसलमानों को विधायी प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए की गई थी। बाद में, मोहम्मद अली जिन्ना ने कांग्रेस छोड़कर इसका नेतृत्व संभाला और अंततः देश के विभाजन की मांग की, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान का निर्माण हुआ।
​भारतीयों के मन में मुस्लिम लीग की छवि एक खलनायक संगठन की रही है, जिसने भारत की एकता को खंडित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी तरह, मोहम्मद अली जिन्ना को भी देश के बंटवारे के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी और निशिकांत दुबे ने इसी ऐतिहासिक और भावनात्मक पहलू का उपयोग करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला है, यह दिखाने के लिए कि कांग्रेस ने अतीत में देश विरोधी ताकतों के सामने घुटने टेके थे। यह विवाद दिखाता है कि इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े मुद्दे आज भी भारतीय राजनीति में कितने जीवंत और संवेदनशील हैं।

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