ओम बिरला: माइक विवाद से अविश्वास प्रस्ताव तक, लोकसभा अध्यक्ष के चर्चित किस्से

क्या ओम बिरला निष्पक्ष रहे? राहुल गांधी के माइक बंद करने के आरोपों से लेकर 140 सांसदों के निलंबन तक, जानिए ओम बिरला के कार्यकाल की पूरी कहानी।
 
​भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में लोकसभा अध्यक्ष का पद हमेशा

​भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में लोकसभा अध्यक्ष का पद हमेशा से गरिमा और चुनौतियों का मिश्रण रहा है। लेकिन 17वीं और अब 18वीं लोकसभा के दौरान ओम बिरला का कार्यकाल जिस तरह की सुर्खियों और विवादों में रहा, वैसा कम ही देखने को मिलता है। कोटा से सांसद और दूसरी बार स्पीकर की कुर्सी संभालने वाले बिरला पर जहाँ सत्ता पक्ष अनुशासन बनाए रखने का श्रेय देता है, वहीं विपक्ष उन पर 'आवाज दबाने' के गंभीर आरोप लगाता रहा है।

​1. राहुल गांधी का 'माइक विवाद': क्या सच में आवाज रोकी गई?

​विपक्ष और विशेष रूप से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बार-बार यह आरोप लगाया कि सदन में जब वे बोलने के लिए खड़े होते हैं, तो उनका माइक बंद कर दिया जाता है।

​विपक्ष का तर्क: राहुल गांधी का कहना था कि जब भी वे अडाणी समूह या संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरते हैं, उनका माइक्रोफोन म्यूट कर दिया जाता है। यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना।

​सचिवालय का स्पष्टीकरण: लोकसभा सचिवालय और ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि स्पीकर के पास 'माइक स्विच' नहीं होता। नियमों के अनुसार, जिसे बोलने की अनुमति दी जाती है, उसका माइक तकनीकी टीम द्वारा चालू किया जाता है।

​टकराव का बिंदु: यह विवाद सदन की कार्यवाही के डिजिटल रिकॉर्ड और टीवी फीड पर विपक्ष के विजुअल्स न दिखाने के आरोपों तक फैल गया।

​2. अविश्वास प्रस्ताव और स्पीकर की भूमिका

​ओम बिरला के कार्यकाल में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। हालांकि संख्या बल सरकार के पक्ष में था, लेकिन चर्चा के दौरान स्पीकर की भूमिका पर सबकी नजरें थीं।

​मणिपुर मुद्दा: मणिपुर हिंसा पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।

​बिरला का रुख: उन्होंने चर्चा के लिए समय आवंटित किया, लेकिन विपक्ष का आरोप था कि प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान उन्हें टोकने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि विपक्षी नेताओं के भाषणों में लगातार व्यवधान डाला गया।

​3. सांसदों का ऐतिहासिक निलंबन (Suspension)

​ओम बिरला के कार्यकाल की सबसे चर्चित और विवादास्पद घटनाओं में से एक है सांसदों का सामूहिक निलंबन।

​दिसंबर 2023 की घटना: संसद की सुरक्षा में चूक के मुद्दे पर गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहे 140 से अधिक सांसदों को एक ही सत्र में निलंबित कर दिया गया।

​तर्क: बिरला का कहना था कि तख्तियां लहराना और वेल (Well) में आना सदन की गरिमा के खिलाफ है।

​आलोचना: इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का 'काला अध्याय' बताया गया, क्योंकि विपक्ष की अनुपस्थिति में कई महत्वपूर्ण विधेयक (जैसे नए आपराधिक कानून) पारित कर दिए गए।

​4. सदन की 'मर्यादा' बनाम 'अभिव्यक्ति की आजादी'

​ओम बिरला अक्सर कहते हैं कि वे सदन की मर्यादा के रक्षक हैं। उनके कार्यकाल में कई शब्दों को 'असंसदीय' घोषित किया गया, जिस पर भारी बवाल हुआ।

​'जुमलाजीवी', 'तानाशाह', 'भ्रष्ट' जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर पाबंदी की सूची जारी की गई।

​विपक्ष ने इसे सरकार को आलोचना से बचाने की ढाल करार दिया।

​5. नए संसद भवन का निर्माण और तकनीक

​एक सकारात्मक पहलू के रूप में, ओम बिरला के नेतृत्व में भारत को नया संसद भवन मिला। उन्होंने 'डिजिटल संसद' ऐप और कार्यवाही को पेपरलेस बनाने पर जोर दिया।

​सदन के भीतर तकनीक का समावेश और सांसदों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उनके कार्यकाल की उपलब्धियां मानी जाती हैं।

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