Rafale vs Su-57 India: भारत की 'मेक इन इंडिया' और रक्षा आत्मनिर्भरता की राह में एक नया मोड़ आ गया है। एक तरफ फ्रांस के साथ राफेल (Rafale) की डील है, जहाँ तकनीक के हस्तांतरण (ToT) और सोर्स कोड (Source Code) को लेकर पेंच फंसा है। दूसरी तरफ, रूस ने अपने सबसे आधुनिक 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 (Checkmate) को भारत के सामने पेश कर हलचल मचा दी है।
1. सोर्स कोड का विवाद: फ्रांस क्यों पीछे हट रहा है?
सोर्स कोड किसी भी आधुनिक लड़ाकू विमान का 'मस्तिष्क' होता है। इसके बिना भारत विमान में अपनी मिसाइलें (जैसे अस्त्र या ब्रह्मोस) एकीकृत नहीं कर सकता या भविष्य में सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए फ्रांस पर निर्भर रहना होगा।
संप्रभुता का मुद्दा: भारत चाहता है कि वह अपनी ज़रूरत के हिसाब से राफेल को मॉडिफाई कर सके।
फ्रांसीसी सुरक्षा: फ्रांस अपनी संवेदनशील तकनीक को साझा करने में हिचकिचाता है, क्योंकि यह उनके 'क्राउन ज्वैल्स' की तरह है।
कीमत की दीवार: तकनीक हस्तांतरण के साथ राफेल की कीमत कई गुना बढ़ जाती है, जो भारत के लिए एक बजटीय चुनौती है।
2. रूस का Su-57 ऑफर: 'ललचाने वाला' क्यों है?
जब फ्रांस के साथ बातचीत ठंडी पड़ती दिख रही है, तब रूस ने भारत को Su-57 के सह-उत्पादन (Co-production) का ऑफर दिया है।
5वीं पीढ़ी की ताकत: राफेल 4.5 पीढ़ी का विमान है, जबकि Su-57 पूरी तरह से स्टील्थ (Stealth) तकनीक से लैस 5वीं पीढ़ी का विमान है।
सह-उत्पादन का वादा: रूस ने संकेत दिया है कि वह भारत में इसका निर्माण करने और तकनीक साझा करने को तैयार है।
चीन और पाकिस्तान का मुकाबला: चीन के पास पहले से ही J-20 (5th Gen) है। इसे काउंटर करने के लिए भारत को जल्द से जल्द इसी श्रेणी का विमान चाहिए।
3. क्या Su-57 राफेल की जगह ले सकता है?
यह तुलना जितनी आसान दिखती है, उतनी है नहीं। दोनों विमानों की भूमिका अलग है:
विशेषता राफेल (Rafale) Su-57 (Felon/Checkmate)
पीढ़ी 4.5 Generation 5th Generation
भूमिका मल्टिरोल, सटीक हमला एयर सुपीरियरिटी, स्टील्थ
लड़ाई का अनुभव युद्ध में परखा हुआ (Combat Proven) सीमित युद्ध अनुभव
रखरखाव महंगा लेकिन विश्वसनीय जटिल और अनिश्चित
चुनौतियां: भारत ने पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम छोड़ दिया था क्योंकि रूस की तकनीक और पारदर्शिता पर सवाल थे। क्या रूस अब उन कमियों को दूर कर पाएगा?
4. निष्कर्ष: भारत का अगला कदम क्या होगा?
भारत फिलहाल 'टू-फ्रंट वॉर' की स्थिति को देखते हुए संतुलित रुख अपना रहा है। राफेल एम (Rafale-M) नौसेना के लिए प्राथमिकता है, लेकिन वायुसेना के लिए 114 MRFA (Multi-Role Fighter Aircraft) की रेस अभी खुली है। यदि फ्रांस सोर्स कोड नहीं देता है, तो रूस का पलड़ा भारी हो सकता है, बशर्ते वह तकनीक हस्तांतरण पर खरा उतरे।