गणतंत्र दिवस 2026 के पावन अवसर पर देश की राजधानी दिल्ली का कर्तव्य पथ एक बार फिर भारतीय संस्कृति और सैन्य शक्ति के अद्भुत संगम का गवाह बना। इस वर्ष की परेड में हिमाचल प्रदेश की झांकी आकर्षण का केंद्र रही, जिसने न केवल देवभूमि की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया, बल्कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले अपने वीर सपूतों के जज्बे को भी दुनिया के सामने रखा।
देवभूमि की सांस्कृतिक झलक: 'अतुल्य हिमाचल'
हिमाचल प्रदेश की झांकी जैसे ही कर्तव्य पथ पर गुजरी, दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इसका स्वागत किया। इस बार झांकी का विषय मुख्य रूप से हिमाचली लोक कला और आध्यात्मिकता पर केंद्रित था।
पारंपरिक वास्तुकला: झांकी में काष्ठ कला (Wood carving) के अद्भुत नमूनों और प्राचीन मंदिरों की शैली को दर्शाया गया।
लोक नृत्य: झांकी के साथ चल रहे कलाकारों ने पारंपरिक 'नाटी' नृत्य प्रस्तुत कर कर्तव्य पथ को हिमाचली रंग में सराबोर कर दिया।
हस्तशिल्प: कुल्लू की प्रसिद्ध शॉल और चंबा रूमाल की बारीकियों को भी झांकी के माध्यम से जीवंत किया गया, जो 'वोकल फॉर लोकल' के संकल्प को मजबूती प्रदान करती है।
शौर्य की पराकाष्ठा: हिमाचल के झोली में आए वीरता पुरस्कार
हिमाचल प्रदेश को 'वीर भूमि' के नाम से जाना जाता है, और इस वर्ष के वीरता पुरस्कारों की घोषणा ने इस कथन को पुनः सिद्ध कर दिया है। भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों में अपनी सेवाएं दे रहे हिमाचल के कई जवानों को उनकी अदम्य साहस और वीरता के लिए सम्मानित किया गया।
प्रमुख बिंदु:
वीरता पुरस्कारों की संख्या: इस वर्ष हिमाचल प्रदेश के कई सपूतों को कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र (मरणोपरांत सहित) से नवाजा गया है।
ऑपरेशनल बहादुरी: पुरस्कार विजेताओं में वे जवान शामिल हैं जिन्होंने सीमा पर घुसपैठ रोकने और दुर्गम क्षेत्रों में बचाव अभियानों के दौरान अपनी जान की परवाह न करते हुए देश की रक्षा की।
गौरवशाली इतिहास: कारगिल युद्ध के नायक रहे कैप्टन विक्रम बत्रा और राइफलमैन संजय कुमार की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष के विजेताओं ने फिर साबित किया कि देश की रक्षा के लिए हिमाचल का हर घर तैयार रहता है।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल की बधाई
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने राज्य के इन वीर सपूतों और झांकी दल को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा, "यह हमारे लिए गर्व का क्षण है कि कर्तव्य पथ पर हमारी संस्कृति की चमक दिखी और हमारे वीरों के शौर्य को राष्ट्रीय पहचान मिली। हिमाचल का योगदान राष्ट्र निर्माण और सुरक्षा में हमेशा सर्वोपरि रहेगा।"