भारत के 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) पर दुनिया एक ऐतिहासिक आर्थिक महाशक्ति का उदय देखने वाली है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अपने अंतिम चरण में है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' करार दिया है। इस डील के होते ही न केवल भारत के लिए यूरोप के द्वार खुल जाएंगे, बल्कि चीन और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धियों के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा।
ट्रंप के टैरिफ का करारा जवाब
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और कई यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ (50% तक) लगाने की घोषणा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में भारत-EU की यह दोस्ती एक 'आर्थिक सुरक्षा कवच' का काम करेगी। अमेरिका पर निर्भरता कम होगी और भारतीय निर्यातकों को एक वैकल्पिक और विशाल बाज़ार मिलेगा।
इन सेक्टर्स की चमकेगी किस्मत:
टेक्सटाइल और लेदर: भारतीय कपड़ों और जूतों पर ड्यूटी खत्म होने से इनकी मांग यूरोप में तेजी से बढ़ेगी।
ऑटोमोबाइल और वाइन: यूरोप से आने वाली लग्जरी कारें और वाइन भारत में सस्ती हो सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं को फायदा होगा।
IT और सर्विसेज: भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए यूरोप में काम करना और वीजा पाना आसान हो जाएगा।
फार्मा: भारतीय दवाओं के लिए यूरोपीय बाज़ार में एंट्री के नियम सरल होंगे।
चीन-पाकिस्तान क्यों हैं परेशान?
चीन को दरकिनार कर यूरोपीय देश अब अपनी 'सप्लाई चेन' के लिए भारत पर भरोसा कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान जो अब तक यूरोपीय बाजारों में कुछ खास रियायतों का फायदा उठाता था, भारत की इस मेगा-डील के बाद पिछड़ सकता है। 27 जनवरी को होने वाले 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।