देश के कई राज्यों में 14 और 15 जनवरी 2026 को स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है, जिससे बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों में उत्साह और खुशी की लहर दौड़ गई है। यह छुट्टियाँ मुख्य रूप से मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल और सर्दी की वजह से दी गई हैं।
सर्दियों के मौसम के इस चरण में — विशेषकर उत्तर भारत में — कई राज्यों में ठंड और कोल्ड वेव के प्रभाव के कारण भी छुट्टियाँ बढ़ाई जा रही हैं, ताकि बच्चों और स्कूल स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित होती रहे।
क्या कहा गया है – छुट्टियों का विवरण
14 जनवरी 2026 (बुधवार)
राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, असम और अन्य राज्यों में 14 जनवरी को स्कूलों में छुट्टियाँ घोषित की गई हैं।
इन छुट्टियों का मुख्य कारण मकर संक्रांति और लोहड़ी जैसे पारंपरिक त्योहार हैं, जिनका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है।
यही दिन उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोहड़ी भी मनाई जाती है, जो किसानों, बच्चों और ग्रामीण समुदायों में ख़ास उत्साह का दिन होता है।
15 जनवरी 2026 (गुरुवार)
कई राज्यों में 15 जनवरी को भी छुट्टी घोषित की गई है — विशेषकर मकर संक्रांति के आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश के रूप में।
उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जनवरी की जगह अब 15 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इस आदेश के तहत राज्य के 75 जिलों में सरकारी कार्यालय, स्कूल और संस्थान इस दिन बंद रहेंगें।
कई राज्यों में ठंड की वजह से जारी शीतलहर को देखते हुए भी स्कूल प्रशासन ने छुट्टियों को बढ़ाया है।
बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया
छुट्टियाँ घोषित होते ही बच्चों ने खुशी जताई है और सोशल मीडिया पर अपने उत्साह को साझा किया है। अभिभावकों का कहना है कि ठंड के मौसम में स्कूलों में छुट्टी से बच्चों की भलाई, स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है। शिक्षकों ने भी इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि यह निर्णय समय की आवश्यकता था।
क्यों मिल रही हैं छुट्टियाँ – प्रमुख कारण
1. त्योहारी मौसम और सांस्कृतिक मान्यताएँ
मकर संक्रांति भारत में एक महत्त्वपूर्ण त्योहार है, जो सौर कैलेंडर के अनुसार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है। यह दिन शुक्रवार 14 जनवरी की शाम को संक्रांति तिथि के कारण मनाया जाएगा, लेकिन कई जगहों पर आधिकारिक छुट्टी 15 जनवरी को ही घोषित की गई है ताकि पारंपरिक उत्सव शास्त्र सम्मत तरीके से हो सकें।
2. सर्दियाँ और कोल्ड वेव की परिस्थितियाँ
उत्तर भारत में इस सर्दी के मौसम में लगातार कोल्ड वेव और घना कोहरा देखा जा रहा है। इसके कारण कई जिलों में प्रशासन ने स्कूलों की छुट्टियों को आवश्यक सुरक्षा उपायों के रूप में बढ़ाया है, ताकि बच्चे और स्कूल स्टाफ ठंड में परेशान न हों।
3. राज्य-विशेष छुट्टियाँ और स्कूल कैलेंडर
कुछ राज्यों ने मौसम और स्थानीय त्यौहारों के आधार पर अपने स्कूल कैलेंडर में अलग-अलग छुट्टियाँ घोषित की हैं।
उदाहरण के लिए:
तमिलनाडु में पोंगल के अवसर पर स्कूलों को 15, 16 और 17 जनवरी तक अवकाश दिया गया है।
अन्य राज्यों में भी श्रमिक कलेंडर अनुसार छुट्टियों का विस्तार हो रहा है।
राज्यवार विवरण – स्कूल छुट्टियों का पूरा माहौल
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जनवरी के बजाय 15 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इस आदेश के अनुसार सभी सरकारी कार्यालय, स्कूल और कॉलेज इस दिन बंद रहेंगे और बच्चे मकर संक्रांति का उत्सव परिवार संग मना सकेंगे।
दिल्ली और एनसीआर
दिल्ली में पहले से योजनाबद्ध सर्दियों की छुट्टियाँ 1 से 15 जनवरी तक घोषित थीं, जिन्हें कड़ाके की ठंड की वजह से लागू रखा जा रहा है।
नोएडा, गुरुग्राम जैसे एनसीआर हिस्सों में भी इसी अवधि तक स्कूल बंद रहेंगे।
पंजाब और हरियाणा
पंजाब और हरियाणा में पिछली छुट्टियाँ और लोहड़ी-मकर संक्रांति की वजह से 14 जनवरी को स्कूल बंद रहेंगे।
तमिलनाडु
तमिलनाडु ने पोंगल के अवसर पर 15 से 17 जनवरी तक स्कूल बंद करने का निर्णय लिया है, जिससे बच्चों और परिवारों को उत्सव मनाने का पर्याप्त समय मिलेगा।
दक्षिण और पूर्वी राज्यों में छुट्टियाँ
कर्नाटक, तेलंगाना और असम जैसे राज्यों ने भी 14 या 15 जनवरी को छुट्टियाँ घोषित की हैं ताकि बच्चे त्योहार और पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल हो सकें।
मौसम का प्रभाव और सुरक्षा के पहलू
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी कोल्ड वेव अलर्ट और लगातार गिरते तापमान को देखते हुए कई राज्यों ने पढ़ाई के घंटे कम किए, स्कूलों में देर से कक्षाएं शुरू कीं, या पूरी तरह छुट्टी घोषित कर दी ताकि बच्चों को रात-सवेरे की कड़ाके की ठंड से बचाया जा सके।
शिक्षा और सामुदायिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
यह निर्णय केवल छुट्टियों तक सीमित नहीं है — इसका लक्ष्य बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा, सड़क-परेलिंथ स्थितियों में सुधार, और अभिभावकों के दृष्टिकोण से आर्थिक एवं भावनात्मक समर्थन देना भी है।
छुट्टियों के कारण बच्चों में उत्साह तो बढ़ा है ही, साथ ही अभिभावकों ने बताया है कि इस निर्णय से सुरक्षा, परिवार-समय, उत्सव, और मौसम से बचाव की भावना को बल मिला है।
विश्लेषण: क्या यह निर्णय संतुलित है?
यह एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, क्योंकि:
बच्चों को मौसम से सुरक्षा मिलती है
पारिवारिक और सांस्कृतिक अवसरों का समर्थन होता है
स्वास्थ्य और शिक्षा के बीच तालमेल बनाए रखता है
कुछ चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं:
🔹 कई निजी स्कूलों में अकादमिक कैलेंडर प्रभावित हो सकता है
🔹 बोर्ड परीक्षा-जैसी कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है
🔹 लॉजिस्टिक्स और शिक्षण योजना को पुनः समायोजित करना होगा
लेकिन कुल मिलाकर यह निर्णय स्थानिक मौसम, सांस्कृतिक परंपरा, और छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।