भारत की राजधानी दिल्ली के 'भारत मंडपम' में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' वैश्विक तकनीक के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है। इस सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण आकर्षणों में से एक गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात रही। 18 फरवरी को हुई इस उच्च स्तरीय वार्ता के बाद पिचाई ने स्पष्ट किया कि भारत न केवल एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को अपना रहा है, बल्कि इस क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
1. गूगल का $15 बिलियन का बड़ा निवेश और विशाखापट्टनम में AI हब
सुंदर पिचाई ने घोषणा की है कि गूगल भारत में एआई बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश कर रहा है। इसके तहत विशाखापट्टनम (Vizag) में एक 'फुल-स्टैक एआई हब' स्थापित किया जाएगा। यह हब भारत के स्टार्टअप्स और वैज्ञानिकों के लिए तकनीक का केंद्र बनेगा।
2. 2 करोड़ सरकारी कर्मचारियों को AI की ट्रेनिंग
भारत के डिजिटल सशक्तिकरण के उद्देश्य से गूगल ने 'कर्मयोगी भारत' मिशन के तहत एक बड़ी प्रतिबद्धता जताई है। गूगल भारत के 800 जिलों में लगभग 2 करोड़ सरकारी कर्मचारियों को 18 विभिन्न भाषाओं में AI प्रशिक्षण प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता और दक्षता लाना है।
3. इंटरनेट की सुपरफास्ट रफ्तार: अमेरिका-भारत कनेक्ट
डिजिटल डिवाइड को खत्म करने के लिए पिचाई ने 'अमेरिका-इंडिया कनेक्ट' पहल की जानकारी दी। इसके तहत समुद्र के नीचे चार नए फाइबर ऑप्टिक केबल सिस्टम बिछाए जा रहे हैं, जो भारत और अमेरिका के बीच डेटा ट्रांसफर की गति को कई गुना बढ़ा देंगे। इससे भारत में एआई मॉडल्स को प्रोसेस करना सस्ता और तेज हो जाएगा।
4. शिक्षा और अनुसंधान पर जोर
1.1 करोड़ छात्रों को कोडिंग: गूगल 10,000 स्कूलों के बच्चों को कोडिंग और रोबोटिक्स सिखाने में मदद करेगा।
₹250 करोड़ का रिसर्च फंड: मौसम की सटीक भविष्यवाणी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए वैज्ञानिकों को 250 करोड़ रुपये का ग्लोबल रिसर्च फंड दिया जाएगा।
सर्च लाइट टूल: भारतीय यूजर्स अब फोटो खींचकर या अपनी स्थानीय भाषा में बोलकर रियल-टाइम में जटिल जानकारियां सर्च कर पाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी का 'डेवलप इन इंडिया' विजन
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "एआई अगर दिशाहीन हो तो वह विनाशकारी है, लेकिन सही दिशा मिलने पर यह दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं का समाधान है।" उन्होंने दुनिया से आह्वान किया कि वे भारत में एआई डिजाइन करें और यहीं विकसित करें।
निष्कर्ष: ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करता भारत
यह समिट इस बात का प्रमाण है कि भारत 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की आवाज बन रहा है। जहां बिल गेट्स जैसे दिग्गजों ने इस बार दूरी बनाई, वहीं सुंदर पिचाई, सैम ऑल्टमैन और जेनसेन हुआंग जैसे लीडर्स की उपस्थिति ने भारत की तकनीकी ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है।