भारत सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कोड (श्रम संहिता) अब देश में लागू होने के लिए तैयार हैं। ये कोड 29 पुराने और बिखरे हुए श्रम कानूनों को एक साथ मिलाकर एक सरल और आधुनिक ढांचा प्रदान करते हैं, जिसका सीधा असर देश के करोड़ों श्रमिकों और सभी तरह के नियोक्ताओं (Employers) पर पड़ेगा। इन ऐतिहासिक सुधारों का मुख्य लक्ष्य 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ाना और साथ ही श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है।
इन कोड्स के तहत, वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और व्यावसायिक सुरक्षा तथा स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल की स्थितियों से संबंधित बड़े प्रावधान किए गए हैं।
श्रमिकों को मिलने वाले 7 प्रमुख लाभ:
1. सभी के लिए न्यूनतम और समय पर वेतन (Timely and Minimum Wages):
'वेतन संहिता 2019' के तहत, अब देश के हर एक मजदूर को न्यूनतम मजदूरी का वैधानिक अधिकार मिल गया है। यह असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर भी लागू होगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार एक 'राष्ट्रीय फ्लोर वेज' (National Floor Wage) तय करेगी, जिससे राज्यों को अपनी न्यूनतम मजदूरी इस सीमा से कम रखने की अनुमति नहीं होगी। यह पूरे देश में वेतन असमानता को कम करेगा। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि नियोक्ताओं के लिए मासिक वेतन का भुगतान समय पर करना अनिवार्य होगा, जिससे श्रमिकों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होगी।
2. ग्रेच्युटी का नियम बदला, अब 1 साल की नौकरी पर भी लाभ:
नए नियमों में 'फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉइज' (FTEs) को बड़ी राहत दी गई है। अब ये कर्मचारी केवल एक साल की सेवा पूरी करने के बाद भी ग्रेच्युटी (Gratuity) के हकदार होंगे, जबकि पहले इसके लिए 5 साल की न्यूनतम सेवा आवश्यक थी। फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को अब स्थायी कर्मचारियों के बराबर ही सभी लाभ (जैसे छुट्टी, चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा) मिलेंगे।
3. 'हायर बेसिक पे' और बढ़ी हुई सामाजिक सुरक्षा:
नए कोड्स में 'वेतन' की परिभाषा को बदला गया है। अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि कर्मचारी की कुल सैलरी में भत्तों (Allowances) का हिस्सा 50% से अधिक नहीं हो सकता। इसका मतलब है कि बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता (DA) और रिटेनिंग भत्ता को मिलाकर कुल वेतन का कम से कम 50% होना चाहिए। इस बदलाव के कारण भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों की गणना अब बेसिक वेतन के बड़े हिस्से पर होगी, जिससे कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड में बड़ी वृद्धि होगी। हालांकि, इसके चलते तात्कालिक 'टेक-होम सैलरी' (हाथ में आने वाला वेतन) थोड़ा कम हो सकता है।
4. 40 साल से अधिक उम्र के श्रमिकों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच:
'व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य करने की स्थिति संहिता' (OSHWC Code) के तहत, नियोक्ताओं के लिए 40 वर्ष से अधिक उम्र के सभी कर्मचारियों को साल में एक बार मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच (Free Annual Health Check-up) प्रदान करना अनिवार्य होगा। यह प्रावधान श्रमिकों के बीच समय पर निवारक स्वास्थ्य देखभाल (Preventive Healthcare) की संस्कृति को बढ़ावा देगा।
5. ओवरटाइम का दोगुना भुगतान और कार्य सीमा तय:
निश्चित किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से प्रतिदिन 8 से 12 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं कराया जाएगा। यदि कर्मचारी ओवरटाइम करता है, तो उसे उसकी सहमति से और सामान्य वेतन दर से कम से कम दोगुना भुगतान करना अनिवार्य होगा।
6. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा का दायरा:
पहली बार 'गिग वर्कर्स' और 'प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स' (जैसे डिलीवरी और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े श्रमिक) को कानूनी रूप से मान्यता दी गई है। सामाजिक सुरक्षा कोड के तहत, एग्रीगेटरों (Aggregators) को अपने वार्षिक कारोबार का 1-2% कल्याण कोष (Welfare Fund) में योगदान देना होगा, जिससे इन श्रमिकों को भी पेंशन, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
7. महिला श्रमिकों के लिए समान अवसर:
महिला कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया गया है। अब उनकी सहमति और पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ उन्हें नाइट शिफ्ट (रात्रि पाली) में काम करने की भी अनुमति होगी।