ट्रंप का 'टैरिफ धमाका': भारत और चीन पर 500% तक बढ़ सकता है आयात शुल्क, जानें पूरा मामला

Trump Tariff on India to be raised: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर नकेल कसने के लिए एक नए बिल को मंजूरी दी है। इसके तहत भारत और चीन पर 500% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
 
Trump Tariff on India to be raised

Trump Tariff on India to be raised: ट्रंप का 'टैरिफ वार': क्या भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में आएगी दरार? 500% टैक्स का पूरा सच

वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे विवादास्पद बिल को अपनी हरी झंडी दे दी है, जो न केवल भारत और चीन के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है, बल्कि वैश्विक व्यापार के समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख सकता है। यह बिल सीधे तौर पर उन देशों को निशाना बनाता है जो यूक्रेन युद्ध के बावजूद रूस से कच्चे तेल और यूरेनियम की खरीद जारी रखे हुए हैं।

​इस बिल के प्रावधानों के तहत, भारत और चीन जैसे देशों से अमेरिका आने वाले सामानों पर आयात शुल्क (Tariffs) को बढ़ाकर 500% तक किया जा सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और इसके दूरगामी परिणाम क्या हो सकते हैं।

​1. क्या है यह नया बिल और किसने किया पेश?

​अमेरिकी सीनेट में इस बिल को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने संयुक्त रूप से पेश किया है। इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पूरा समर्थन प्राप्त है। लिंडसे ग्राहम ने हाल ही में ट्रंप के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर पुष्टि की कि राष्ट्रपति इस बिल को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

​इस बिल का मुख्य उद्देश्य रूस की आर्थिक कमर तोड़ना है। अमेरिका का तर्क है कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश रूस से सस्ता तेल खरीदकर व्लादिमीर पुतिन की 'वॉर मशीन' को फंडिंग कर रहे हैं। इस बिल के जरिए ट्रंप प्रशासन को यह कानूनी अधिकार मिल जाएगा कि वह रूस से व्यापार करने वाले देशों पर अत्यधिक टैरिफ थोप सके।

​2. 500% टैरिफ का गणित: भारत पर क्या होगा असर?

​पिछले साल ही ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर 25% का बेस टैरिफ लगाया था। इसके अतिरिक्त, रूस से तेल खरीदने के 'जुर्माने' के तौर पर 25% का और टैक्स जोड़ा गया, जिससे कुल शुल्क 50% तक पहुंच गया था। लेकिन अब जो नया प्रस्ताव है, वह और भी अधिक आक्रामक है।

​विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बिल कानून बनता है, तो चुनिंदा उत्पादों पर टैक्स की सीमा 500% तक जा सकती है। इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका में बिकने वाला भारतीय सामान इतना महंगा हो जाएगा कि उसकी मांग पूरी तरह खत्म हो सकती है। भारत के आईटी सेक्टर, कपड़ा उद्योग, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पादों (विशेषकर चावल) पर इसका सबसे बुरा असर पड़ने की संभावना है।

​3. 'पीएम मोदी मेरे दोस्त हैं, लेकिन...' : ट्रंप का कड़ा रुख

​हाल ही में एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़े बयान दिए। उन्होंने कहा, "पीएम मोदी एक बेहतरीन इंसान हैं और वह मेरे अच्छे मित्र हैं, लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि अमेरिका के हितों से समझौता नहीं किया जा सकता। वे जानते हैं कि मैं इस बात (रूसी तेल की खरीद) से खुश नहीं हूँ। व्यापार में बराबरी होनी चाहिए, एकतरफा फायदा नहीं चलेगा।"

​ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह बहुत जल्द भारत पर नए प्रतिबंध और टैक्स लगा सकते हैं। उन्होंने भारतीय चावल पर भी टैक्स बढ़ाने की चेतावनी दी है, क्योंकि अमेरिकी किसानों ने शिकायत की है कि भारत और थाईलैंड जैसे देश सस्ता अनाज बेचकर अमेरिकी बाजार को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

​4. चीन और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव

​भारत के साथ-साथ चीन भी ट्रंप के निशाने पर है। अमेरिका पहले ही चीन से आने वाले सामानों पर 145% तक का टैक्स लगा चुका है। जवाब में चीन ने भी अमेरिकी उत्पादों पर 125% टैक्स लगाया है। यदि 500% वाला यह नया बिल लागू होता है, तो दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक पूर्ण 'ट्रेड वॉर' छिड़ सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो जाएगी।

​5. भारत का पक्ष: संप्रभुता और ऊर्जा सुरक्षा

​भारत सरकार ने इस मामले पर हमेशा अपना रुख साफ रखा है। विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए संप्रभु है।

​सस्ता तेल: रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल भारत की अर्थव्यवस्था को महंगाई से बचाने में मदद करता है।

​किसानों का हित: भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को बचाने के लिए किसी भी दबाव में नहीं आएगा। अमेरिकी मांग है कि भारत अपने बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोले, लेकिन भारत अपने करोड़ों छोटे किसानों की आजीविका के साथ समझौता नहीं करना चाहता।

​6. आर्थिक प्रभाव: क्या टूटेगी वैश्विक अर्थव्यवस्था?

​अगर 500% टैरिफ लागू होता है, तो इसके कई घातक परिणाम हो सकते हैं:

​महंगाई: अमेरिका में भारतीय और चीनी सामान महंगे होने से वहां के उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा।

​निर्यात में गिरावट: भारत का निर्यात सेक्टर, जो पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रहा है, बुरी तरह प्रभावित होगा।

​डॉलर बनाम अन्य मुद्राएं: इस व्यापार युद्ध से वैश्विक मुद्राओं में अस्थिरता आएगी।

​रूस की निर्भरता: अमेरिका की इस सख्ती के कारण भारत और चीन जैसे देश रूस और ईरान के साथ वैकल्पिक पेमेंट सिस्टम (जैसे कि रुपये-रूबेल व्यापार) को और अधिक मजबूत कर सकते हैं, जो भविष्य में डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है।

​7. अगले हफ्ते की वोटिंग पर टिकी नजरें

​लिंडसे ग्राहम के अनुसार, इस बिल पर अगले हफ्ते अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में वोटिंग हो सकती है। ट्रंप के पास वर्तमान में सदन में मजबूत समर्थन है, इसलिए इस बिल के पास होने की संभावना काफी अधिक है। यदि यह बिल पास हो जाता है, तो व्हाइट हाउस के पास भारत और चीन जैसे देशों को 'ब्लैकमेल' करने या उन पर भारी आर्थिक दबाव डालने का एक कानूनी हथियार मिल जाएगा।

Tags