ट्रंप की एक धमकी और धड़ाम हुआ गोल्ड मार्केट; जानें सोने-चांदी में आई इस सुनामी की असली वजह
Gold and Silver ETFs में 12% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और मजबूत डॉलर ने सोने-चांदी के निवेशकों को दिया झटका। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Thu, 22 Jan 2026
Gold-Silver ETFs Crash: डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट, जानें निवेशकों के लिए क्या हैं इसके मायने
हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। खासकर Gold and Silver ETFs (Exchange Traded Funds) में आई भारी गिरावट ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। कुछ चुनिंदा गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में 12% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट उस समय आई है जब ग्लोबल मार्केट में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के हालिया बयानों और अमेरिकी आर्थिक नीतियों ने तहलका मचा रखा है।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ क्यों क्रैश हुए, इसके पीछे के प्रमुख कारण क्या हैं और क्या यह निवेशकों के लिए खरीदारी का सही मौका है।
1. गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ (ETF) में गिरावट का वर्तमान परिदृश्य
भारतीय बाजारों में मंगलवार और बुधवार के सत्र के दौरान गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ की कीमतों में अप्रत्याशित कमी देखी गई। निवेशकों के पोर्टफोलियो में शामिल ये फंड्स, जो आमतौर पर सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, अचानक बिकवाली के दबाव में आ गए।
गिरावट का स्तर: कई फंड्स में 5% से लेकर 12% तक की इंट्रा-डे गिरावट देखी गई।
वॉल्यूम में उछाल: भारी गिरावट के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई, जो बड़े संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) द्वारा मुनाफावसूली या डर के संकेत देता है।
2. गिरावट के मुख्य कारण (Why Gold-Silver Prices Crashed?)
गोल्ड और सिल्वर के भाव केवल भारत में नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभावित हुए हैं। इसके पीछे कई भू-राजनीतिक और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं:
A. डोनाल्ड ट्रंप का 'टैरिफ वॉर' और डॉलर की मजबूती
नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में मेक्सिको, कनाडा और चीन जैसे देशों पर भारी Import Tariffs (आयात शुल्क) लगाने की धमकी दी है। इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर (US Dollar Index) बेहद मजबूत हो गया है।
नियम: आमतौर पर सोने और डॉलर का उल्टा संबंध होता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की कीमतों में गिरावट आती है क्योंकि यह अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए महंगा हो जाता है।
B. भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेत
मध्य पूर्व (इजरायल-हिजबुल्लाह) में युद्धविराम (Ceasefire) की खबरों ने बाजार में 'रिस्क-ऑन' (Risk-on) सेंटीमेंट पैदा किया है। जब युद्ध की स्थिति शांत होती है, तो निवेशक सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों (Safe Haven Assets) से पैसा निकालकर शेयर बाजार में लगाने लगते हैं।
C. अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) का रुख
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों के कारण यह संभावना जताई जा रही है कि फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती की रफ्तार धीमी कर सकता है। उच्च ब्याज दरें सोने की होल्डिंग लागत को बढ़ा देती हैं, जिससे इसकी मांग घटती है।
D. प्रॉफिट बुकिंग (Profit Booking)
पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी ने रिकॉर्ड ऊंचाई को छुआ था। निवेशक इस समय ऊंचे स्तरों पर मुनाफा वसूलना बेहतर समझ रहे हैं, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतें गिर गईं।
3. ETF बनाम फिजिकल गोल्ड: अंतर समझना जरूरी
गिरावट के समय कई निवेशक इस बात से हैरान थे कि ज्वेलरी की दुकानों पर सोने के भाव उतने नहीं गिरे जितने ईटीएफ में दिखे। इसका कारण Tracking Error और बाजार की Liquidity होती है। ईटीएफ सीधे स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं, इसलिए इनमें उतार-चढ़ाव फिजिकल मार्केट की तुलना में अधिक तेज और हिंसक (Violent) हो सकता है।
4. चांदी (Silver) पर डबल मार क्यों?
चांदी की कीमतों में गिरावट सोने से भी अधिक रही। इसका मुख्य कारण यह है कि चांदी एक Industrial Metal भी है। ट्रंप की टैरिफ नीतियों से वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने का डर है। चूंकि चीन चांदी का एक बड़ा उपभोक्ता है, इसलिए वहां से मांग कम होने की आशंका ने चांदी की कीमतों को नीचे धकेल दिया।
5. एक्सपर्ट्स की राय और भविष्य की राह
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अल्पकालिक (Short-term) हो सकती है।
सपोर्ट लेवल: विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के लिए $2,600 और $2,550 प्रति औंस का स्तर एक मजबूत सपोर्ट का काम करेगा।
लंबी अवधि का नजरिया: यदि आप 2-3 साल के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो यह गिरावट खरीदारी का एक शानदार अवसर (Buying on Dips) हो सकती है।
6. निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
यदि आपके पास गोल्ड या सिल्वर ईटीएफ हैं, तो घबराहट (Panic) में आकर बेचने से बचें।
SIP जारी रखें: अगर आप गोल्ड ईटीएफ में एसआईपी के जरिए निवेश कर रहे हैं, तो इसे बंद न करें। कम कीमतों पर आपको अधिक यूनिट्स मिलेंगी।
पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग: अपने पोर्टफोलियो का 10-15% से ज्यादा हिस्सा सोने में न रखें।
ट्रंप की नीतियों पर नजर: जनवरी में ट्रंप के शपथ ग्रहण और उनकी आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखें, क्योंकि बाजार में अभी और अस्थिरता देखी जा सकती है।
निष्कर्ष
गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में आई यह 12% तक की गिरावट वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी डॉलर के दबदबे का परिणाम है। हालांकि, भारतीय निवेशकों के लिए सोना हमेशा से ही संकट का साथी रहा है। इसलिए, गिरावट को डर के बजाय एक अवसर के रूप में देखना अधिक समझदारी भरा हो सकता है।
