युद्ध ने बिगाड़ा बजट: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग, इन देशों में मच सकता है विद्रोह

कच्चे तेल की कीमतों ने $100 का आंकड़ा पार किया। जानें कैसे इजरायल-ईरान युद्ध ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में आर्थिक तबाही के संकेत दिए हैं।
 
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Middle East Crisis: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) को हिलाकर रख दिया है। साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब Crude Oil Prices ने $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार किया है। इस उछाल ने न केवल विकसित देशों की चिंता बढ़ाई है, बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे उन मुल्कों में 'हाहाकार' मचा दिया है जो पहले से ही Economic Crisis और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहे हैं।

​क्यों लगी कच्चे तेल की कीमतों में आग?

​इस Price Hike के पीछे सबसे बड़ा कारण Geopolitical Tension है। ईरान और इजरायल के बीच सीधा टकराव शुरू होने से Supply Chain बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है।

​Hormuz Strait Risk: दुनिया का लगभग 20% तेल शिपमेंट 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' से होकर गुजरता है। अगर ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है, तो तेल की कीमतें $120-$150 तक जा सकती हैं।

​Inventory Shortage: अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों में तेल का स्टॉक कम होना भी कीमतों को सहारा दे रहा है।

​War Escalation: इजरायल द्वारा ईरान के तेल ठिकानों (Oil Facilities) को निशाना बनाए जाने की आशंका ने Market Sentiment को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

​पड़ोसी देशों में 'हाहाकार': पाकिस्तान और बांग्लादेश की बढ़ी मुश्किलें

​तेल की कीमतों में इस उछाल का सबसे बुरा असर दक्षिण एशिया के गरीब और विकासशील देशों पर पड़ रहा है।

​1. पाकिस्तान (Pakistan)

​पाकिस्तान पहले से ही IMF Bailout और भारी कर्ज के नीचे दबा हुआ है। $100 के पार कच्चे तेल का मतलब है कि पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएंगी। इससे Hyper-inflation का खतरा बढ़ गया है। वहां की जनता पहले से ही बिजली और आटे के लिए संघर्ष कर रही है, अब महंगे तेल के कारण Logistics Cost बढ़ने से हर चीज महंगी हो जाएगी।

​2. बांग्लादेश (Bangladesh)

​बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक अस्थिरता के बाद अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन इस Global Energy Crisis ने उनकी कमर तोड़ दी है। बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है। Foreign Exchange Reserves में गिरावट के बीच महंगा तेल उनके बजट को पूरी तरह बिगाड़ सकता है।

​भारत पर क्या होगा असर?

​भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। हालांकि भारत के पास Diversified Sources (जैसे रूस से सस्ता तेल) हैं, फिर भी वैश्विक कीमतों में उछाल घरेलू बाजार में Inflation (महंगाई) बढ़ा सकता है। अगर तेल की कीमतें $100 के ऊपर टिकी रहती हैं, तो सरकार पर Petrol-Diesel Prices बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा।

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