रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने न केवल वैश्विक राजनीति को बदला है, बल्कि युद्ध की रणनीतियों को भी नई दिशा दी है। ईरान, जो मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जाता है, उसने यूक्रेन युद्ध का गहराई से अध्ययन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने यह सीख लिया है कि कैसे कम लागत वाले हथियारों और 'एसिमेट्रिक वॉरफेयर' (असमान युद्ध) के जरिए एक महाशक्ति को घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सकता है।
ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी भौगोलिक स्थिति है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका नियंत्रण। यदि ईरान इस जलडमरूमध्य को बंद करता है, तो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए इसे फिर से खोलना अब पहले जैसा आसान नहीं होगा।
यूक्रेन युद्ध से ईरान ने क्या सीखा?
यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को दिखाया कि लाखों डॉलर की मिसाइलों को कुछ हजार डॉलर के कामिकेज ड्रोन (Kamikaze Drones) से तबाह किया जा सकता है। ईरान ने इस युद्ध से निम्नलिखित तीन मुख्य सबक सीखे हैं:
ड्रोन और मिसाइल स्वाम (Swarm) तकनीक: यूक्रेन में रूसी सेना ने ईरानी 'शहाद' ड्रोन्स का इस्तेमाल कर यूक्रेनी एयर डिफेंस को थका दिया। ईरान ने समझा है कि अगर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें एक साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तैनात अमेरिकी बेड़े पर छोड़ी जाएं, तो दुनिया का सबसे आधुनिक डिफेंस सिस्टम भी फेल हो जाएगा।
सस्ते हथियार बनाम महंगे जहाज: एक विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) की कीमत अरबों डॉलर होती है, जबकि उसे निशाना बनाने वाली ईरानी एंटी-शिप मिसाइल या ड्रोन की कीमत बेहद कम है। ईरान अब 'क्वालिटी' के बजाय 'क्वांटिटी' पर जोर दे रहा है।
समुद्री बारूदी सुरंगें (Sea Mines): यूक्रेन ने काला सागर (Black Sea) में रूसी नौसेना को रोकने के लिए जिस तरह माइन्स का इस्तेमाल किया, ईरान उसे और भी बड़े पैमाने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दोहरा सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है दुनिया की रग?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है।
विश्व के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% से 30% इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।
ओमान और ईरान के बीच स्थित इस रास्ते की चौड़ाई कुछ जगहों पर महज 21 मील है।
सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे देशों का तेल निर्यात पूरी तरह इसी मार्ग पर निर्भर है।
अमेरिका के लिए इसे खोलना मुश्किल क्यों होगा?
दशकों पहले, अमेरिका की 'टैंकर वॉर' (1980 के दशक) में जीत आसान थी क्योंकि तब तकनीक सीमित थी। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है:
1. भौगोलिक लाभ (Topographical Advantage)
ईरान का तट उबड़-खाबड़ और पहाड़ी है। यहाँ ईरान ने 'मिसाइल सिटीज' बनाई हैं, जो जमीन के नीचे छिपी हुई हैं। अमेरिका के लिए इन मोबाइल लॉन्चरों को ट्रैक करना और नष्ट करना लगभग असंभव है।
2. ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइलें
ईरान के पास 'खलीज फारस' जैसी एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो मच 3 की रफ्तार से हमला करती हैं। यूक्रेन युद्ध ने साबित किया है कि भारी मात्रा में किए गए मिसाइल हमले किसी भी नौसैनिक बेड़े को पीछे हटने पर मजबूर कर सकते हैं।
3. प्रॉक्सी वॉर और हूती विद्रोहियों का अनुभव
लाल सागर में हूती विद्रोहियों ने जिस तरह से वैश्विक व्यापार को बाधित किया है, वह ईरान के लिए एक 'ट्रायल रन' जैसा था। अगर ईरान खुद सीधे युद्ध में उतरता है, तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को 'किलिंग ज़ोन' में बदल सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। अमेरिका भले ही सैन्य रूप से शक्तिशाली हो, लेकिन वह एक लंबी और महंगी जंग का बोझ नहीं उठा पाएगा, खासकर तब जब घरेलू स्तर पर महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता का दबाव हो।