Testicular Torsion Symptoms: तिलक वर्मा को जिस बीमारी ने अस्पताल पहुँचाया, वह पुरुषों को बना सकती है उम्रभर के लिए निसंतान; जानें क्या है 'टेस्टिकुलर टॉर्शन' और इसके लक्षण
Testicular Torsion Symptoms: क्रिकेटर तिलक वर्मा को हाल ही में टेस्टिकुलर टॉर्शन के कारण सर्जरी करानी पड़ी। जानिए यह गंभीर बीमारी क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और यह कैसे पुरुष बांझपन का कारण बन सकती है।
Wed, 18 Feb 2026
क्रिकेटर तिलक वर्मा की बीमारी 'टेस्टिकुलर टॉर्शन' ने बढ़ाई चिंता, लापरवाही पड़ सकती है भारी; जा सकती है पिता बनने की क्षमता
भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे तिलक वर्मा इन दिनों अपनी एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चर्चा में हैं। विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान अचानक पेट के निचले हिस्से में उठे तेज दर्द ने उन्हें अस्पताल पहुँचा दिया, जहाँ जाँच के बाद पता चला कि वह 'टेस्टिकुलर टॉर्शन' (Testicular Torsion) नामक एक मेडिकल इमरजेंसी से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों की सलाह पर राजकोट के एक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल में उनकी तत्काल सर्जरी की गई।
क्या है टेस्टिकुलर टॉर्शन?
अमेरिकन यूरोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, टेस्टिकुलर टॉर्शन एक ऐसी स्थिति है जब अंडकोष (testicle) के आसपास के ऊतक सही तरह से जुड़े नहीं होते। इस वजह से अंडकोष, स्पर्मेटिक कॉर्ड (Spermatic Cord) के चारों ओर मुड़ जाता है। इस मरोड़ के कारण अंडकोष में होने वाली रक्त की आपूर्ति (Blood Flow) पूरी तरह रुक जाती है। यह एक अत्यंत गंभीर स्थिति है क्योंकि रक्त न मिलने पर अंडकोष के ऊतक मर सकते हैं।
पिता बनने का सपना हो सकता है चकनाचूर
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी केवल दर्दनाक ही नहीं है, बल्कि पुरुषों की प्रजनन क्षमता (Fertility) पर भी सीधा प्रहार करती है। यदि समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह 'मेल इनफर्टिलिटी' (Male Infertility) का कारण बन सकती है। डॉक्टर हिमांशु गुप्ता के अनुसार, अंडकोष शुक्राणु उत्पादन के लिए जिम्मेदार होते हैं। यदि रक्त की आपूर्ति बाधित होने के कारण अंडकोष क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो व्यक्ति के पिता बनने की संभावना खत्म हो सकती है।
सावधान! इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
टेस्टिकुलर टॉर्शन के लक्षण अचानक और बहुत तीव्र होते हैं:
अंडकोष में अचानक और असहनीय दर्द होना।
अंडकोष की थैली (Scrotum) में सूजन और लाली आना।
अंडकोष के आकार या उसकी स्थिति में बदलाव महसूस होना।
पेट के निचले हिस्से में दर्द, मतली या उल्टी आना।
6 घंटे का 'गोल्डन पीरियड'
विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक 'मेडिकल इमरजेंसी' है। यदि दर्द शुरू होने के 6 घंटे के भीतर सर्जरी के जरिए रक्त प्रवाह बहाल नहीं किया जाता, तो अंडकोष के पूरी तरह खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। आँकड़ों के मुताबिक, यदि सर्जरी में 12 घंटे से अधिक की देरी होती है, तो 75% मामलों में अंडकोष को शरीर से बाहर निकालना पड़ सकता है।
किसे है अधिक खतरा?
यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन 25 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में यह अधिक देखी जाती है। आंकड़ों के अनुसार, हर 4,000 में से 1 पुरुष इस समस्या का सामना करता है।
