करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने संसद में इस बात की पुष्टि की है कि EPFO 3.0 प्रोजेक्ट के तहत अब पीएफ क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया को क्रांतिकारी तरीके से तेज़ किया जा रहा है। जहां पहले पीएफ का पैसा निकालने में 20 से 30 दिनों का समय लगता था, वहीं अब नई तकनीक के जरिए यह काम मात्र 3 दिनों (72 घंटे) के भीतर पूरा किया जा सकेगा।
श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार ईपीएफओ के पूरे आईटी ढांचे को आधुनिक बना रही है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य "Ease of Living" को बढ़ावा देना और सब्सक्राइबर्स को उनके हक का पैसा बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के तुरंत उपलब्ध कराना है।
EPFO 3.0 क्या है और यह कैसे काम करेगा?
EPFO 3.0 ईपीएफओ के तकनीकी ढांचे का तीसरा और सबसे आधुनिक चरण है। यह केवल एक सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं है, बल्कि एक पूरी तरह से बदला हुआ डिजिटल ईकोसिस्टम है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
ऑटो-सेटलमेंट मोड (Auto-Settlement): नई प्रणाली में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का उपयोग किया जा रहा है। अगर किसी सब्सक्राइबर का KYC पूरी तरह अपडेट है, तो शिक्षा, बीमारी या शादी जैसे एडवांस क्लेम के लिए किसी अधिकारी की मंजूरी की ज़रूरत नहीं होगी। सिस्टम खुद ही डेटा वैलिडेट करेगा और पैसा ट्रांसफर कर देगा।
सेंट्रलाइज्ड आईटी सिस्टम: वर्तमान में ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालयों के आधार पर काम करता है। EPFO 3.0 के बाद पूरा डेटा एक केंद्रीकृत डेटाबेस पर होगा, जिससे सर्वर डाउन होने या डेटा मिसमैच की समस्या खत्म हो जाएगी।
UPI के जरिए भुगतान: सरकार की योजना क्लेम की गई राशि को सीधे UPI के माध्यम से बैंक खाते में भेजने की है, जिससे NEFT/RTGS में लगने वाला अतिरिक्त समय भी बचेगा।
संसद में सरकार का रुख
संसद के मौजूदा सत्र में एक सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि ईपीएफओ के पास वर्तमान में लगभग 28 लाख करोड़ रुपये का कॉर्पस है और 7-8 करोड़ सक्रिय सदस्य हैं। इतने बड़े आधार को संभालने के लिए पुराने सिस्टम (Legacy Systems) पर्याप्त नहीं थे।
सरकार ने स्पष्ट किया कि IT Modernization Project 2.0 के अंतिम चरण के साथ ही EPFO 3.0 की नींव रख दी गई है। आंकड़ों के अनुसार, 2026 तक अधिकांश ऑनलाइन क्लेम्स का निपटारा 3 से 8 दिनों के भीतर होने लगेगा।
सब्सक्राइबर्स को क्या फायदा होगा?
भ्रष्टाचार पर लगाम: मैनुअल प्रोसेसिंग खत्म होने से अधिकारियों द्वारा फाइल रोकने या रिश्वत की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
कम रिजेक्शन रेट: अक्सर छोटी गलतियों की वजह से क्लेम रिजेक्ट हो जाते थे। नए सिस्टम में 'सेल्फ-करेक्शन' की सुविधा दी गई है, जिससे सदस्य खुद अपनी गलतियां सुधार सकेंगे।
इमरजेंसी में तुरंत मदद: मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में 20 दिन का इंतज़ार जानलेवा हो सकता था। 3 दिन में पैसा मिलने से करोड़ों परिवारों को सुरक्षा मिलेगी।
इन बातों का रखना होगा ध्यान
3 दिन में क्लेम पाने के लिए सब्सक्राइबर्स को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी:
आपका UAN आधार से लिंक होना चाहिए।
बैंक अकाउंट का विवरण और IFSC कोड सही और सत्यापित होना चाहिए।
मोबाइल नंबर ईपीएफओ पोर्टल और आधार दोनों पर एक्टिव होना चाहिए।