रीवा में जमीनी विवाद ने पकड़ा तूल: पूर्व सीएसपी पर बाउंड्री वॉल गिरवाने का आरोप, दोनों पक्षों में तनाव

Rewa News: रीवा जिले के चोरहटा थाना क्षेत्र में गुरुवार को एक पुराने जमीन विवाद ने तनाव का रूप ले लिया, जब पूर्व सीएसपी पन्नालाल अवस्थी पर बिना सूचना के बाउंड्री वॉल गिरवाने का आरोप लगा।
 
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Rewa MP News: इस घटना के बाद क्षेत्र में हंगामे जैसी स्थिति बन गई और पुलिस को मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराना पड़ा। विवाद 40 साल पुरानी जमीन की सीमाओं को लेकर है, जिसमें अब दो पक्ष आमने-सामने हैं।
जानकारी के अनुसार, यह जमीन विवाद रिटायर्ड सीएसपी पन्नालाल अवस्थी और कमलेश गुप्ता के परिवार के बीच है। गुप्ता परिवार का कहना है कि उनके पास करीब 22,000 स्क्वायर फीट जमीन है, जिसे उन्होंने 40 साल पहले खरीदा था। उनका आरोप है कि पूर्व सीएसपी ने बिना किसी पूर्व सूचना या राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी के जेसीबी बुलवाकर उनकी बाउंड्री वॉल गिरवा दी।
कमलेश गुप्ता ने बताया कि “हमारे घर में कल रात एक कार्यक्रम था और पूरा परिवार उसी में व्यस्त था। इस बीच मौके का फायदा उठाकर बाउंड्री गिरा दी गई। इतना ही नहीं, पूर्व सीएसपी ने कालम खुदवाकर अपनी नई बाउंड्री भी बनवानी शुरू कर दी।” इस घटना के बाद गुप्ता परिवार ने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई और पुलिस को सूचना दी।
वहीं दूसरी ओर, रिटायर्ड सीएसपी पन्नालाल अवस्थी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि जमीन उनकी खुद की है और वे केवल पुरानी बाउंड्री को दोबारा सही करवा रहे थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में वे खुद यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि वे बाउंड्री दीवार दोबारा बनवा रहे हैं।
विवाद बढ़ने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को शांत कराया। थाना प्रभारी आशीष मिश्रा ने बताया कि दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने की समझाइश दी गई है। फिलहाल, यह तय किया गया है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में जमीन की दोबारा नापजोख कराई जाएगी। इसके बाद ही असली सीमा तय की जाएगी, ताकि भविष्य में विवाद न बढ़े।
गुप्ता परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व सीएसपी अपने पुलिसिया प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं और रौब झाड़कर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, अवस्थी ने इन आरोपों को “निराधार” बताते हुए कहा कि वे किसी तरह का दबाव नहीं बना रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह जमीन शहर के अंदर प्राइम लोकेशन पर स्थित है, जिसकी मौजूदा कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। इसी वजह से यह विवाद कई सालों से लंबित है। अब एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बन गई है।
फिलहाल पुलिस ने पूरे क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी है और राजस्व अधिकारियों को जल्द से जल्द मापी कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि नापजोख के बाद ही कानूनी रूप से तय किया जाएगा कि जमीन किसकी है और आगे निर्माण की अनुमति किसे दी जा सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रिटायरमेंट के बाद भी कुछ अधिकारी अपने पद का प्रभाव दिखाने से पीछे नहीं हटते। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद सच्चाई किस पक्ष के पक्ष में आती है।